परदे के रहकर इन 5 लोगों ने गुरमीत सिंह (Gurmeet) को दिलाई 10 साल की सजा

सीबीआई की विशेष आदालत ने गुरमीत (Gurmeet) सिंह को धारा 376, 511 और 506 के तहत 10 साल की सजा सुनाई है. इस जोखिम भरे केस में एक तरफ पूरी सरकार और दूसरी तरफ सीबीआई के कुछ कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी, पीड़िता और कुछ पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है. आइए उनके बारे में जानें.

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परदे के रहकर इन 5 लोगों ने गुरमीत सिंह (Gurmeet) को दिलाई 10 साल की सजा

सीबीआई की विशेष आदालत ने गुरमीत (Gurmeet) सिंह को धारा 376, 511 और 506 के तहत 10 साल की सजा सुनाई है. हलांकि राजनीति में जबरदस्त प्रभाव रखने वाले गुरमीत सिंह को इस मामले में दोषी ठहराना मुशिकलों से भरा था. आइए उन लोगों के बारे में जानें जिन्होंने इस लड़ाई में बिना विचलित हुए चुपचाप ईमानदारी से अपना काम किया.

1. गुरमीत (Gurmeet) सिंह पर आरोप लगाने वाली साध्वियां

जाहिर है इस मामले को 15 साल पहले उजागर करने वाली वो दो साध्वियां इस सूचि पहले नम्बर पर आती हैं. आरोप लगाने के बाद तमाम मुश्किलें और दबाव झेलते हुए भी ये अपने स्टैंड पर कायम रहीं. आपको बता दें कि इन्होंने ही 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को गुमनाम पात्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई थी.

2. इनके भाई रंजीत सिंह

परदे के रहकर इन 5 लोगों ने गुरमीत सिंह (Gurmeet) को दिलाई 10 साल की सजा

गुमनाम पत्र लिखने के बाद एक साध्वी के भाई रंजीत सिंह पर डेरा समर्थकों को शक हुआ. और इस शक की बुनियाद पर उन्होंने कथित रूप से कुछ ही दिनों बाद रंजीत सिंह की हत्या कर दी. तो इसकी कीमत साध्वी के भाई ने भी चुकाई.

3. पूरा सच के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति

साध्वियों के गुमनाम पत्र को पूरा सच ने ही पहली बार प्रकाशित किया था. इस अखबार ने ही पहली बार इस रेप केस की जानकारी दी थी. खबर प्रकाशित होने के कुछ ही दिन बाद छत्रपति की कुछ लोगों ने उनके घर पर गोली मारकर हत्या कर दी.

4. सीबीआई अधिकारी सतीश डागर और मुलिंजो नारायनन

ये वो शख्स हैं जिनके बिना शायद ये लड़ाई नहीं जीती जा सकती थी. इस मामले की जांच सीबीआई के ये दो अधिकारी ही कर रहे थे. इनकी निष्ठा और इमानदारी के कारण इन्हें भी कई बार दबाव में लेने की कोशिश की गई लेकिन ये दोनों अविचल भाव से इस मामले की जांच पूरी की और सबूत इकट्ठे किए.

5. सीबीआई जज जगदीप सिंह

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जाहिर है ऐसे मामले इमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोगों के कारण ही सामने आ पाते हैं. सीबीआई जज जगदीप सिंह भी ऐसे ही लोगों में हैं जिनके इमानदारी की मिसाल दी जाती है. इस हाई प्रोफाइल मामले में इन्होंने ही गुरमीत सिंह को दोषी ठहराया और आज 10 साल कैद की सजा भी सुनाई.

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