निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों की सजा बरकरार, कोर्ट इसे ‘सदमे की सुनामी’ कहा

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निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों की सजा बरकरार, कोर्ट इसे 'सदमे की सुनामी' कहा

निर्भया (Nirbhaya) रेप केस ने मानवता को झकझोर कर रख दिया था. इस घटना की देश भर में एक स्वर में निंदा की गई थी. इसी केस पर आज माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है.

निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों की सजा बरकरार, कोर्ट इसे 'सदमे की सुनामी' कहा

क्या कहा निर्भया की माँ ने?

निर्भया की मां आशा देवी ने पुरे समाज को उनका समर्थन करने के लिए शुक्रिया अदा किया. इसके साथ ही उन्होंने ये उम्मीद भी लगाई कि आगे भी हम ऐसे ही एकजुट होकर बच्चियों के लिए लड़ेंगे. उन्होंने ये माना कि हमारी व्यवस्था कहीं न कहीं लचर तो है लेकिन आज न्यायालय ने साबित कर दिया कि न्याय मिलने में देर है लेकिन अंधेर नहीं है. जाहिर है इस घटना ने एक बहुत बड़ा आन्दोलन खड़ा कर दिया था. कैंडल मार्च भी हुआ और कई देश में कई जगह प्रदर्शन हुए थे.

निर्भया (Nirbhaya) रेप और सर्वोच्च न्यायालय

कोर्ट के अनुसार यह एक बर्बर घटना और सदमे की सुनामी थी. आपको बता दें कि निचली अदालत ने मुकेश, पवन, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था. माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने निर्भया मामले की सुनवाई करते हुए इसमें चारों दोषियों को मिली मौत की सजा को बरक़रार रखा है. निर्भया केस की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायलय ने अपने फैसले में कहा कि चोटों की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए हम उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हैं.

निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों की सजा बरकरार, कोर्ट इसे 'सदमे की सुनामी' कहा

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के बाद 27 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने फैसले में साफ़-साफ़ कहा कि चारों दोषियों को रियायत नहीं दी जा सकती. जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने तो यहाँ तक कहा कि, “इस बर्बरता के लिए माफ़ी नहीं दी जा सकती और अगर किसी मामले में मौत की सज़ा हो सकती है तो वो यही मामला है.”

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