पीरियड्स (Periods) से होने वाली ये 2 बीमारियाँ जिनके बारे में किसी को नहीं पता

पीरियड्स (Periods) के मुद्दे पर भी कई तरह की बंदिशें हैं हमारे समाज में. सबसे बड़ी समस्या तो ये है कि इस विषय में कोई खुलकर बात नहीं करता है. तो आइये इस पर बात करते हैं.

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पीरियड्स (Periods) के मुद्दे पर भी कई तरह की बंदिशें हैं हमारे समाज में. सबसे बड़ी समस्या तो ये है कि इस विषय में कोई खुलकर बात नहीं करता है. जबकि एक तो पीरियड ऐसे ही महिलाओं के लिए हर महीने कमजोरी और दर्द लेकर आती हैं और ऊपर से इससे बिमारी होने का भी खतरा हो तो इससे बुरा क्या हो सकता है. तो आइये इस पर बात करते हैं.

पीरियड्स (Periods) और इससे उत्पन्न बीमारियाँ

पीरियड्स (Periods) से होने वाली ये 2 बीमारियाँ जिनके बारे में किसी को नहीं पता

इस बारे में शहरों में तो फिर भी बात होती है और लोग इसे लेकर मुखर हो रहे हैं. लेकिन गावों और दूर-दराज के क्षेत्रों में अभी भी इसे छिपाया जाता है. जबकि इस जरूरत इस बात की  है कि इस मामले में जितनी ज्यादा से ज्यादा बात की जाए. लेकिन ऐसा न हो पाने से कई औरतें बिमारियों से दो चार हो रहीं हैं. इससे मुख्य रूप से दो बीमारियाँ होने की संभावना हैं:

1. गर्भाशय कैंसर का ख़तरा

पीरियड्स के दौरान होने वाली दूसरी गंभीर बिमारी है पीरियड के बंद होने के बाद सवाईकल कैंसर होने का खतरा. हालांकि हार्मोनल दवाइयों और गर्भ निरोधक गोलियां भी कैंसर होने का कारण हो सकतीं हैं. इसमें भी पीरियड्स के दौरान अत्यधिक खून निकलता है. इसमें ये बात भी गौर करने वाली है कि कई बार ख़ून को क्लॉट करने वाले प्रोटीन का लेवल गिरने से भी ये बीमारी हो सकती है. इस बीमारी का भी आम तौर पर पता नहीं लग पाता है.

2. मेनेरेजिया 

इस बिमारी में पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा खून निकलता है. इसमें समस्या ये है कि चूँकि पीरियड्स के दौरान स्वाभाविक रूप से खून निकलता है इसलिए इसका पता आम तौर पर लगा पाना मुश्किल होता है. इस बिमारी के होने की कई वजहें हैं पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम, हार्मोन्स में असंतुलन, मोटापा, थॉयराइड की प्रॉब्लम, गर्भाशय में गांठें हो जाना हलांकि इसमें कई बार यूट्रस की झिल्ली पर असामान्य रूप से टिशू भी पैदा हो जाते हैं.

ये है इसका इलाज

पीरियड्स (Periods) से होने वाली ये 2 बीमारियाँ जिनके बारे में किसी को नहीं पता

पीरियड्स के दौरान अत्यधिक खून निकलने की बिमारी के इलाज में दो महत्वपूर्ण फैक्टर हैं. पहला है उम्र और दूसरा है बिमारी की गंभीरता. इसके लिए आप चाहें तो गोलियां ले सकते हैं या फिर सर्जरी का भी विकल्प है आपके पास या दोनों विकल्प भी इइस्तेमाल कर सकते हैं. इसलिए बेहतर यही है कि किसी भी तरह की अनियमितता दिखने पर फौरन जांच कराएं.

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